दर्शन के लिए आवश्यक है विचार

यूनान की महान दार्शनिक परंपरा में तीन दर्शनशास्त्रियों ने पूरे संसार को चौका दिया था । अरस्तू , भारत पर आक्रमण करने वाले सिकन्दर का गुरु था । प्लेटो , अरस्तू का और सुकरात , प्लेटो का गुरु था ।
सुकरात बचपन से ही विचारशील था । इससे स्पष्ट होता है कि आज तक जितने दर्शन (Philosophy )के नुमाइंदे धरती पर पैदा हुए , सारे के सारे अपना खुद का विचार रखते थे । हर क्षेत्र में विचारो का पर्याय जरुरी होता है ।

Published by Abhijit Pathak

I am Abhijit Pathak, My hometown is Azamgarh(U.P.). In 2010 ,I join a N.G.O (ASTITVA).

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