पहले आधारशिला तो बना लिजिए ।

अगर बात की जाय उस शुरुआती दौर की , जहाँ से हम किसी मुकाम तक पहुंचने के लिए एक सुनियोजित रास्ता बनाते हैं । हाँ ,शायद यह भी हो  सकता हैँ कि इसके लिए हम बिना सोचे समझे भी वहाँ तक पहुँच सकते हैं । लेकिन क्या हम लगातार इसे बनाये रखने में कामयाब हो सकते हैं । अगर आप  संभावनाओं  के बल पर तरक्की के आसार बनाने के आदी हो चुके हो ,तो उसे तुरंत छोड देना चाहिए ।

हमारे लिए हर वक्त एक सुनहरा अवसर प्रतिक्षा के लिेए नजरें गड़ाये बैठा रहता हैं । पर पहले उसे पहचानने के लिए आधारशिला तो बना लिजिए ।

Published by Abhijit Pathak

I am Abhijit Pathak, My hometown is Azamgarh(U.P.). In 2010 ,I join a N.G.O (ASTITVA).

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