राष्ट्रवाद और प्रेम

कोई कडी ऐसी बनी ही नहीं जिसमें किसी को हमेशा के लिए जकड़ कर , कोई रख सके । यह हुआ नफ़रत का माजरा । हाँ एक कडी हैं जिसमें किसी को एहसास ही नहीं होता कि वह किसी के सिकंजे में फंसा हैं । इस कडी का नाम है अनुराग , स्नेह और प्रेम ।

महात्मा गाँधी ने इसको अपनाया , उनका अहिंसा प्रेम का दूसरा रुप था । जब हम मानव जाति से इतना प्रेम करने लग जायें कि किसी को शारीरिक कष्ट भी  देना बुरा लगे , जबकि सामने वाला सहनशक्ति की सारी हदे पार कर चुका हो । तब भी हम उसके ऊपर कोई तकलीफ नहीं दे सकते । यह मानवता से प्रेम नहीं , तो और क्या हैं ।

अगर हम इसके बाद दूसरा नाम ले जिसने प्रेम को दूसरे नजरियें से दिखाने की कोशिश की तो वह थे पंचशील सिद्धांत के प्रतिपादक नेहरु जी , जिहोंने प्रेम को शांति का नाम दिया । इनके हिसाब से दुनिया के सारे देश अगर पास – पास आकर विकास के पथ पर लगातार बढ़ते रहना चाहते हैं तो सभी देशों के बीच शांति की स्थापना कर इस बात को मुमकिन किया जा सकता हैं । और उन्होनें इसी कारण गुटनिरपेक्षता की अवधारणा को सही समझा ।

प्रेम का नया नजरिया दिखाने में माहिर , सरदार बल्लभभाई पटेल  । जिन्होने भारत के सभी  रियासतों को साथ-साथ आने का आह्वान किया । और चूंकि प्रेम का पुकार कभी अनसुना नहीं रहा , इस नाते सभी एक साथ आकर अखंड भारत को एक बनाया । एकता रुपी प्रेम ही था यह , जिसने इतने सारे धर्म को , अलग – अलग भाषाओं  को , तमाम प्रकार के सरहदों को एक बनाया ।

तो मेरा भरसक यहीं प्रयास था कि मैं राष्ट्रवाद और प्रेम के आपसी रिश्ते को आप तक पहुँचा सकूं ।

Published by Abhijit Pathak

I am Abhijit Pathak, My hometown is Azamgarh(U.P.). In 2010 ,I join a N.G.O (ASTITVA).

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