मै उत्तर प्रदेश का वर्तमान हूं

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वर्तमान पर अगर ध्यान दिया जाए तो अतीत और भविष्य दोनों आशावान बन सकते हैं. मगर मै उस प्रदेश का वर्तमान हूं जो बिषम परिस्थितियों में रहने का आदी बन चुका है. यहां इंकलाब की फसल सूख चुकी है और सियासत अपनी मनमर्जियां करने से मान नहीं रही. सुलगते सवालों पर सियासत बार-बार लिपा पोती करने से बिलकुल हिचकती नहीं.
ये कैसी आजादी है जिसमें चारो तरफ तानाशाही का बोलबाला है. आजाद भारत अपने आप में खुद क्यों नहीं एक संगठन बनता. इतने संगठन हैं कि भारत का कदमताल अलग-थलग सा दिखाई देने लगता है.
कौन कहता है कि उत्तर प्रदेश पुरूषप्रधान रहा है, जो लोग ऐसा कह रहे हैं उन्हें कुछ नहीं मालूम. भारत का हरेक प्रदेश नारीप्रधान था और आगे भी रहेगा. इस देश की संस्कृति नारी प्रधानता का उद्देश्य है तभी तो इसकी धरा को धरती माँ और इस देश को भारत माँ कहते हैं.
लगातार उत्तर प्रदेश में लोग असंवेदनशील बनते चले जा रहे हैं. दरअसल, जब तक हम अपने घर में रहते हैं हमें माँ और बहन दिखती हैं. रोड पर चलने वाले संकीर्ण मानसिकता के युवा अपनी आंखें भेड़ियों जैसी बना लेते हैं. ये सोच ऐसे नजरिए ही आपराधिक हैं.
भ्रष्टाचार अगर सरकारें ना करे तो उनका काम चलने से रहा लेकिन किस हद तक का भ्रष्टाचार वाजिब है इस पर भी उन्हें सोचना चाहिए.
मै उस प्रदेश का वर्तमान हूं जिसके एक जिले गोरखपुर में मासूम तड़प तड़प कर मर जाते हैं और बेशर्म राजनीति कहती है कि अगस्त में तो बच्चे मरते ही हैं. सीएम योगी कहते हैं कि लोग ये ना सोच लें कि सरकारें उन्हें पालेंगी.
ट्रेन में चलना यूपी में मौत को दावत देने जैसा हो गया है. महिला सुरक्षा की अगुवाई करने वाली सरकार महिलाओं को पिटवा रही है.
प्रदेश में नुक्ताचीनी और मक्खन लगाने का काम किया जा रहा है. वाराणसी दौरे पर आए पीएम मोदी सीएम योगी की बड़ाई करने से नहीं थक रहे थें और सीएम योगी पीएम मोदी की.
स्वास्थ्य और शिक्षा खस्ताहाल पड़े है. चाहे मेडिकल काॅलेज हो जिला अस्पताल हो या फिर सरकारी दवाई कुछ भी सार्वभौमिक रूप से मौजूद नहीं है. कहीं पर स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या बढ़ रही है तो कहीं डेंगू का लार्वा जमा हो रहा है. कानपुर में एंबुलेंस पंचर रहती है तो लखनऊ में केजीएमयू में लाइट की बिल करोड़ों के पार पहुंच जाती हैं.
कहीं नगर निगम सफाई नहीं कर रहा तो कहीं पर गड्ढामुक्त सड़क किया नहीं गया. कहीं पर शिक्षामित्र प्रदर्शन कर रहे हैं तो कहीं सफाई कर्मचारी. गाजियाबाद में रेयान इंटरनेशनल स्कूल में बच्चे का मर्डर हो जाता है तो कानपुर में एक छात्र को पिटकर टीचर उसके हाथ में फ्रैक्चर करवा देती हैं.
नोएडा में होम बाॅयर्स अधर में पड़े हैं तो कहीं जीएसटी के विरोध में पीएम मोदी का पुतला फूंका जा रहा है. कहीं पर पीने का पानी नहीं मिल रहा तो कहीं बार एसोसिएशन भी अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रही है.
6 महीने में इस सरकार ने क्या किया? कौन सा मास्टर प्लान बना जो फ्लाॅप नहीं हुआ.
#ओजस

Published by Abhijit Pathak

I am Abhijit Pathak, My hometown is Azamgarh(U.P.). In 2010 ,I join a N.G.O (ASTITVA).

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