इश्क़ के अनुकूल सर्दी

मै सर्दी हूं. मुझ पर आरोप लगता है कि मै अपने समयावधि में सबसे ज्यादा इश्क़ करवाती हूं. बनारस के गंगा घाटों पर बैठकर कोई कबीर से इश्क़ कर रहा है तो भी वो मुझे घसीटता है और लिखता है कि साखी की तरह घाटों पर बहते पानी की ठंडी छुवन में कहीं ना कहीं कबीर हैं जिससे उन्हें इश्क़ हो गया.

तो क्या कबीर के मुरीद दलीलें देने वाले इश्क़बाज गर्मियों में कबीर के साखी को जीना छोड़ देते हैं.

प्रेमचंद्र का इश्क़ भी एहसास की प्रचुरता वाली बात कहकर वजह सर्दी यानी मुझे ही बता देता है.

अभी इससे बड़े-बड़े आरोप भी बताने हैं. तसल्ली से सुनिएगा.

फलाने(किसी व्यक्ति) का आरोप है कि उनकी धर्मपत्नी का कितना भी अनबन क्यों ना चल रहा हो लेकिन सारा मामला सर्दी तक आते-आते सल्टिया जरूर जाता है.

प्रद्युम्न कि प्रेमिका सर्दी में उन्हें और प्यार करने लगती है. उनका अनुभव रहा है कि वो इस समयावधि को कभी नहीं भूलते.

आइए चलते हैं मेरठ, यहां एक मशहूर गजलकार विज्ञानव्रत का घर है. विज्ञानव्रत की गजलों में सर्दी में तपन किसी इश्क़ से कमतर ना समझा जाए.

बिहारी लाल की सतसई पढ़िए, मजा जितना सर्दी में आएगा. गर्मी में कबहूं नाही मिलेगा.

अगर आप भी अपने सर्दी वाली इश्क़ का अनुभव शेयर करना चाहे तो कमेंट करे. हो सकता है इस प्रयास से सर्दी के सारे इश्कशुदा के अनुभव और आनंद इकट्ठे किए जा सके.:)
#ओजस

Published by Abhijit Pathak

I am Abhijit Pathak, My hometown is Azamgarh(U.P.). In 2010 ,I join a N.G.O (ASTITVA).

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