पापा का स्नेह-मीमांसा!

पापा काॅलेज से आज जल्दी आ गये. जाने क्या जुनून था कि भरी बारिश में ही शहर निकल गये. हमारे यहां किसी के कहीं जाने पर टोकने को अशुभ करार कर दिया जाता है. फिर भी अगर आपके पिता बरसात रुकने तक का इंतज़ार नहीं कर रहे हैं, तो मन में स्वस्थ जिज्ञासा जाग हीContinue reading “पापा का स्नेह-मीमांसा!”

‘रोशनदान’- बदलाव की उम्मीद के साथ!

भारत में बहुत जल्द कोरोना के डेली केस एक लाख के पार हो जाएंगे लेकिन भारत सरकार का पूरा जोर विधान सभाओं को जीतने में दिख रहा है. आज भारत में 93 हजार से अधिक कोरोना केस सामने आए हैं. हमारे प्रधानमंत्री ने चुनाव प्रचारों में अपने ही कोरोना के खिलाफ दिए नारे ‘दो गजContinue reading “‘रोशनदान’- बदलाव की उम्मीद के साथ!”

मुंबई वाले बाबा और पापा की बीच कुएं का पानी पीने की जिद्द!

छोटे दादाजी यानी बाबा को हम प्यार से मुंबई वाले बाबा बुलाते. मुंबई में नौकरी करने की वजह से ही उन्हें ये नाम दे दिया गया. एक चर्चा में मुझे जब मालूम चला कि उन्हें आखिरी सैलरी सिर्फ़ साढे बारह हजार रुपये ही मिली और कुल जमा छ: लाख पीएफ डिपाॅजिट. तो हैरान रह गया.Continue reading “मुंबई वाले बाबा और पापा की बीच कुएं का पानी पीने की जिद्द!”

मैं फटी हुई या रिप्ड जींस हूं!

मैं फटी हुई जींस या रिप्ड जींस हूं! मैं जींस की फैंसी वर्जन हूं. मुझे तरक्कीपसंद सोच के लड़के या लड़कियां; यहाँ तक की महिलाएं और पुरुष बड़े शौक से पहनते हैं. उत्तराखंड के नये सीएम ने मुझे सुर्खियों में ला दिया है. उनकी संस्कृति के आड़े मैं आ रही थी. सो उन्होंने एक ऐसीContinue reading “मैं फटी हुई या रिप्ड जींस हूं!”

ये जो मिथुन चक्रवर्ती हैं!

गरीबों के अमिताभ बच्चन कहे जाने वाले मिथुन चक्रवर्ती फिल्मों के स्टार हो सकते हैं लेकिन राजनीति में अवसरवादी और दलबदलू नेताओं में इनका नाम शुमार हैं. मिथुन चक्रवर्ती आज बीजेपी का दामन थाम चुके हैं लेकिन इनका राजनीतिक सफरनामा सीपीएम, कांग्रेस, टीएमसी होते हुए यहां तक पहुंचता है. शारदा चिटफंड घोटाले में नाम आनेContinue reading “ये जो मिथुन चक्रवर्ती हैं!”

महिला दिवस का सुरूर!

महिला दिवस आने वाला है. कुछ महिला लेखिकाओं में अचानक नारीवाद उफान मारेगा. दुनियाभर की महिला लेखिकाएं भी हफ्ते भर से सक्रिय दिखाई दे रही हैं. काश! ये मुहिम दिन रात चलाई जाती और इसी ऊर्जा के साथ! तो शायद नारी अस्मिता का आकाश पूरी तरह से साफ दिखाई देता. फेमिनिज़म में विश्वास रखने वालेContinue reading “महिला दिवस का सुरूर!”

एक ‘अज्ञानी’ प्रधानमंत्री के भरोसे मत बैठिये!

2014 के बाद भारतीय राजनीति आस्था का विषय बना दी गई है. अनहद भक्तियुग! कोई प्रधानमंत्री के झूठे दावे के खिलाफ नहीं बोलेगा? नहीं तो उसे गालियाँ दी जाने लगेंगी. उनके अतार्किक और अज्ञानी बातों पर सवाल उठा दे तो उनके समर्थक जान से मारने की धमकियाँ देंगे! एनडीए सरकार की विफलताओं पर बोलने परContinue reading “एक ‘अज्ञानी’ प्रधानमंत्री के भरोसे मत बैठिये!”

दुनिया जिसे कहते हैं!

जो लोग दुनिया की जानकारियों की समझ विकसित कर लेते हैं; उन्हें एक समय बाद राष्ट्रीय समस्याओं में उतनी दिलचस्पी नहीं रह जाती. क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ होने के बाद देश के मुद्दे गौण लगने लगते हैं. या यूँ कहे कि राष्ट्रीय मुद्दों से आपका सरोकार और दिलचस्पी धीरे-धीरे घटने लगती है. आज एकContinue reading “दुनिया जिसे कहते हैं!”

21 फरवरी की डायरी से

मुझे नहीं मालूम कि माया का फंदा किसको फांस रहा है और कौन इसकी चपेट से बाहर है; लेकिन अपने जीवन और इससे मिले अनुभवों से इतना जरूर जान गया हूं कि विषय-विकार सब पर हावी है. किसी चीज़ की कामना ही विषय विकार है; और सोचिए कौन यहाँ उससे बच सका है? किसी कीContinue reading “21 फरवरी की डायरी से”

ये जो ‘टूलकिट’ है!

विरोध के स्वर लोकतंत्र के लिए जरूरी होते हैं और जो हमारा संविधान है, उसमें आलोचना करने की पूरी छूट दी गई है. अगर आप टूलकिट को लेकर परेशान हैं तो सोचिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भी ब्रिटिश हुकूमत की ज्यादतियों के खिलाफ एक खास रणनीति यानी टूलकिट बनाई थी. पत्रकार गांधी ने भीContinue reading “ये जो ‘टूलकिट’ है!”