आतंकवाद से भी ख़तरनाक है लश्करे मीडिया?

लश्कर-ए-मीडिया एक गिरोह है, जो आतंकवाद से भी नुकसानदेह है. महामारी के समय अगर ये चाहती तो अस्पतालों की खराब व्यवस्था पर रिपोर्ट कर लाखों जिंदगियां बचा सकती थी. लेकिन इससे ऐसा नहीं किया. सुशांत+रिया+कंगना+नेपोटिज्म+अनुराग+बाॅलीवुड ड्रग रैकेट से क्या निकला और कितने भारतवासियों का लाभ हुआ. इसमें दूरदर्शिता और प्राथमिकताओं के मूल्यांकन का इतना अभावContinue reading “आतंकवाद से भी ख़तरनाक है लश्करे मीडिया?”

सारे मर्द एक जैसे नहीं होते!

फेमिनिज्म के मुंडेर पर बैठी वो महिलाएं आज चुप हैं, जो एक पुरूष की विकृतियों को समूचे मर्द जमात पर चस्पा कर देती हैं और बड़े आराम से कह देती हैं कि सारे मर्द एक जैसे होते हैं. एक जैसे नहीं होते सारे मर्द और ना ही महिलाएं एक जैसी होती हैं. फेमिनिज्म के पाखंडContinue reading “सारे मर्द एक जैसे नहीं होते!”

अर्णव गोस्वामी की भाषा निम्नस्तरीय है!

अर्णव गोस्वामी का आरोप है कि सोनिया गांधी ने पालघर हत्याकांड पर ट्वीट नहीं किया, मगर वो ट्विटर पर हैं ही नहीं. अर्णव गोस्वामी को संदेह है कि सोनिया गांधी इटली पत्र लिखकर इस बात की वाहवाही लूटेंगी कि हमने महाराष्ट्र में सरकार बनाते ही संतों की हत्या करवा दी. लेकिन हकीकत ये है किContinue reading “अर्णव गोस्वामी की भाषा निम्नस्तरीय है!”

ट्विटरखोरों की भाषा वाकई में शर्मनाक है!

अंग्रेजों ने प्रेमचंद का सोजे वतन जला दिया था लेकिन अपनों ने भरपूर साथ दिया था, अगर प्रेमचंद को भी ऐसी चुनौतियां मिलती तो शायद वो हिंदी के इतने बड़े नामचीन लेखक ना बन पाते! कल न्यूज़रूम में एंकर चित्रा त्रिपाठी इस बात पर चिंता जाहिर कर रही थीं कि लोग छोटी सी गलतियों कोContinue reading “ट्विटरखोरों की भाषा वाकई में शर्मनाक है!”

कुलदीप नैय्यर की अमन की मोमबत्तियां

भारत-पाक विभाजन के समय कुलदीप नैय्यर सियालकोट पाकिस्तान से भारत चले आये थे. एक संगोष्ठी के दौरान उन्होंने बताया था कि किस तरह उन्हें भारत आना पड़ा. उनके अजीज दोस्त जो मुसलमान थें और उनके सहपाठी थे, उनसे छूटते गए. विभाजन के दौरान हुई हिंसा और विस्थापन के दौरान तकरीबन 10 लाख लोग मर कटContinue reading “कुलदीप नैय्यर की अमन की मोमबत्तियां”

देश की आर्थिक हकीकत (1)

जिस देश में 86 फीसदी निजी संपत्ति सोने और जमीन के रूप में हो और महज 14 फीसदी नकदी ही वित्तीय निवेश में आ पाई हो, वहां आर्थिक सुधार(नोटबंदी) भ्रष्टाचार का भला क्या बिगाड़ सकती है। अब इस फेहरिस्त को समझना होगा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रयोग कहीं जाया तो नहीं चलाContinue reading “देश की आर्थिक हकीकत (1)”