पोलेक्जिट का डर?- पोलैंड के संविधान और ‘ईयू लॉ’ के बीच टकराव

पोलैंड की संवैधानिक कोर्ट ने यूरोपियन यूनियन के कुछ नियमों को अपने देश के संविधान के खिलाफ माना है. कोर्ट के इस फैसले के बाद यूरोपीय देशों का संगठन यूरोपियन यूनियन मुश्किल में फंस गया है. वारसॉ कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने ईयू के साथ पोलैंड के समझौते को अपने संविधान के खिलाफ माना. जजोंContinue reading “पोलेक्जिट का डर?- पोलैंड के संविधान और ‘ईयू लॉ’ के बीच टकराव”

राम नाम की लूट है!

राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र की जो जमीन 2 करोड़ की थी, उसे 18 करोड़ में खरीदा गया. भक्त इससे बड़ा सम्मान क्या देते राम को? अब राम मंदिर के नाम के साथ लोग घोटाला शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं. पहले राम के नाम पर सत्ता हथिया लो, फिर लोगों की आस्था के नाम परContinue reading “राम नाम की लूट है!”

भारतीय राजनीति का ‘भक्ति’काल

(2014 से लगातार…)भाग-1 जब साहित्य में भक्तिकाल की बात होती है तो कृष्णमार्गी भक्त सूरदास, राममार्गी तुलसी, ज्ञानमार्गी कबीर और सगुण निर्गुण भक्ति शाखा के बहुत सारे कवियों का नाम लिया जाता है, भक्ति का सामान्य भाव ईश्वर से अन्यतम आस्था का परिचायक है! लेकिन आधुनिक समय में भक्ति और भक्त का सामाजिक और राजनीतिकContinue reading “भारतीय राजनीति का ‘भक्ति’काल”

‘रोशनदान’!

जब कभी ऐसा महसूस हो कि आपके साथ बहुत नाइंसाफी हो रही है, दुनिया में विपन्न लोगों के बारे में पढ़ो. और ये समझने की कोशिश करो कि उन पर अत्याचार कर कौन रहा है. आप खुद को किन्हीं कारकों में जिम्मेदार जरूर पाएंगे. या तो अपने पेशे में भी समाज के सबसे प्रताड़ित वर्गContinue reading “‘रोशनदान’!”

Covid19: We competite not unite!

The superpowers, who were chanting the world to unite and fight against the Corona epidemic, did not share the mechanism of making vaccines with other countries only for their own benefit. As a world, we started competing hard to fight this epidemic. The work would have been carried out. Alas! We would have fought thisContinue reading “Covid19: We competite not unite!”

मैं फटी हुई या रिप्ड जींस हूं!

मैं फटी हुई जींस या रिप्ड जींस हूं! मैं जींस की फैंसी वर्जन हूं. मुझे तरक्कीपसंद सोच के लड़के या लड़कियां; यहाँ तक की महिलाएं और पुरुष बड़े शौक से पहनते हैं. उत्तराखंड के नये सीएम ने मुझे सुर्खियों में ला दिया है. उनकी संस्कृति के आड़े मैं आ रही थी. सो उन्होंने एक ऐसीContinue reading “मैं फटी हुई या रिप्ड जींस हूं!”

ये जो मिथुन चक्रवर्ती हैं!

गरीबों के अमिताभ बच्चन कहे जाने वाले मिथुन चक्रवर्ती फिल्मों के स्टार हो सकते हैं लेकिन राजनीति में अवसरवादी और दलबदलू नेताओं में इनका नाम शुमार हैं. मिथुन चक्रवर्ती आज बीजेपी का दामन थाम चुके हैं लेकिन इनका राजनीतिक सफरनामा सीपीएम, कांग्रेस, टीएमसी होते हुए यहां तक पहुंचता है. शारदा चिटफंड घोटाले में नाम आनेContinue reading “ये जो मिथुन चक्रवर्ती हैं!”

महिला दिवस का सुरूर!

महिला दिवस आने वाला है. कुछ महिला लेखिकाओं में अचानक नारीवाद उफान मारेगा. दुनियाभर की महिला लेखिकाएं भी हफ्ते भर से सक्रिय दिखाई दे रही हैं. काश! ये मुहिम दिन रात चलाई जाती और इसी ऊर्जा के साथ! तो शायद नारी अस्मिता का आकाश पूरी तरह से साफ दिखाई देता. फेमिनिज़म में विश्वास रखने वालेContinue reading “महिला दिवस का सुरूर!”

दुनिया जिसे कहते हैं!

जो लोग दुनिया की जानकारियों की समझ विकसित कर लेते हैं; उन्हें एक समय बाद राष्ट्रीय समस्याओं में उतनी दिलचस्पी नहीं रह जाती. क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ होने के बाद देश के मुद्दे गौण लगने लगते हैं. या यूँ कहे कि राष्ट्रीय मुद्दों से आपका सरोकार और दिलचस्पी धीरे-धीरे घटने लगती है. आज एकContinue reading “दुनिया जिसे कहते हैं!”

21 फरवरी की डायरी से

मुझे नहीं मालूम कि माया का फंदा किसको फांस रहा है और कौन इसकी चपेट से बाहर है; लेकिन अपने जीवन और इससे मिले अनुभवों से इतना जरूर जान गया हूं कि विषय-विकार सब पर हावी है. किसी चीज़ की कामना ही विषय विकार है; और सोचिए कौन यहाँ उससे बच सका है? किसी कीContinue reading “21 फरवरी की डायरी से”