सत्येन्द्र नाथ बोस (1 जन. 1894 – 4 फर.1974)

सत्येन्द्र नाथ बोस भारत के भौतिक के एक मशहूर वैज्ञानिक थे । जिन्हें भारत का दूसरा सर्वोच्च सम्मान पद्म विभूषण 1954 में प्रदान किया गया था । बोसान्स का नामकरण इन्हीं के नाम पर हुआ था । भौतिकी में सापेक्षता के सिद्धान्त से लेकर रसायन के क्वांटम मैकेनिक्स तक में इन्होने बड़ी भूमिका निभाया हैं । इन्होंने श्रोडिंगर , हाइजेनबर्ग , और सोमरफिल्ड की बातों को आगे बढ़ाया और ऱसायन विज्ञान  को एक दिशा प्रदान किया । भौतिकी में भी इन्होने आइन्स्टीन की बातों को एक नयें अन्दाज में प्रस्तुत किया । भारतीय प्रतिभाओं में उनका नाम हमेशा लिया जाना चाहिए । ढाका में दिए गये ऐतिहासिक भाषण को लोग हमेशा याद रखेंगे ।

आज उनको मेरी श्रद्धांजलि ।

खुशवंत सिंह (1915 – 2014)

खुशवंत सिंह एक पत्रकार , साहित्यकार , उपन्यासकार और सामाजिक आदर्शों की स्थापना करने वाले , साथ ही साथ इनकी एक Novel – Train to Pakistan , बड़ी चर्चित हैं । इन्हें देश के प्रतिष्ठित सम्मान पद्मभूषण और पद्मविभूषण से भी  नवाजा गया जा चुका है । आज जन्मदिवस पर मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि ।
1951 में इन्हें All India Radio में पत्रकार के पद पर रखा गया था । फिर 1956 में इन्हें पेरिस के UNESCO में Mass communication , Department में भी  लिया गया ।
1980 से 1986 के बीच इन्होने राज्यसभा में MP पद की गरिमा को भी  बढाया । Operation blue star के विरोध में इन्होंने अपना पद्मभूषण लौटा दिया था ।

Abhijit Pathak

राष्ट्रवाद और प्रेम

कोई कडी ऐसी बनी ही नहीं जिसमें किसी को हमेशा के लिए जकड़ कर , कोई रख सके । यह हुआ नफ़रत का माजरा । हाँ एक कडी हैं जिसमें किसी को एहसास ही नहीं होता कि वह किसी के सिकंजे में फंसा हैं । इस कडी का नाम है अनुराग , स्नेह और प्रेम ।

महात्मा गाँधी ने इसको अपनाया , उनका अहिंसा प्रेम का दूसरा रुप था । जब हम मानव जाति से इतना प्रेम करने लग जायें कि किसी को शारीरिक कष्ट भी  देना बुरा लगे , जबकि सामने वाला सहनशक्ति की सारी हदे पार कर चुका हो । तब भी हम उसके ऊपर कोई तकलीफ नहीं दे सकते । यह मानवता से प्रेम नहीं , तो और क्या हैं ।

अगर हम इसके बाद दूसरा नाम ले जिसने प्रेम को दूसरे नजरियें से दिखाने की कोशिश की तो वह थे पंचशील सिद्धांत के प्रतिपादक नेहरु जी , जिहोंने प्रेम को शांति का नाम दिया । इनके हिसाब से दुनिया के सारे देश अगर पास – पास आकर विकास के पथ पर लगातार बढ़ते रहना चाहते हैं तो सभी देशों के बीच शांति की स्थापना कर इस बात को मुमकिन किया जा सकता हैं । और उन्होनें इसी कारण गुटनिरपेक्षता की अवधारणा को सही समझा ।

प्रेम का नया नजरिया दिखाने में माहिर , सरदार बल्लभभाई पटेल  । जिन्होने भारत के सभी  रियासतों को साथ-साथ आने का आह्वान किया । और चूंकि प्रेम का पुकार कभी अनसुना नहीं रहा , इस नाते सभी एक साथ आकर अखंड भारत को एक बनाया । एकता रुपी प्रेम ही था यह , जिसने इतने सारे धर्म को , अलग – अलग भाषाओं  को , तमाम प्रकार के सरहदों को एक बनाया ।

तो मेरा भरसक यहीं प्रयास था कि मैं राष्ट्रवाद और प्रेम के आपसी रिश्ते को आप तक पहुँचा सकूं ।

झाड़ू की नाराज़गी

मै झाडू हूं । मै सफाई का दावा करने वाला झाडू हूं । मै वहीं हूं , जिसको हाथ में लेकर कई राजनेताओं ने इसे औजार के रुप में इश्तेमाल किया और अपनी काया पलट की  । कुछ ने तो मेरे बदौलत देश में एक ऐसा माहौल पैदा कर दिया , कि छोटे – बड़े सभी ने एक साथ  देश की सफाई का बेड़ा अपने सिर पर लिया। एक नई राजनीतिक पार्टी ने तो मुझे अपने शस्त्रागार के रुप में इश्तेमाल भी  किया । उस वक्त मुझे भ्रष्टाचार निरोधी झाड़ू होने का संज्ञा भी मिला । कितने ने तो मुझे हाथ में लेकर अपने साफ सुथरे होने का दावा भी  किया ।

कुछ लोग पकड़े भी  गये , क्योंकि उन्होनें मुझे हाथ में लेने से पहले कूड़ा खुद फैलाया था । पर , मुझे अफसोस इस बात की हैं कि आज देश की राजधानी में ही मेरे होते हुए कचरा पसरा पड़ा हैं ।

जब कुछ लोगो ने आज मेरे विरोधी कचडे़ को मनीष सिसोदिया के आवास पर फेकना शुरू किया । तो उन्होनें सारी गलती निगम के सिर पर मड़ दिया ।

            मुझे लगा कि शायद वे मेरा जिक्र करेंगे । लेकिन उन्होनें किसी आधार पर मेरा नाम लेना सही नहीं समझा , अब ना तो मै सफाई की मुहिम बन सका और ना ही भ्रष्टाचार विरोधी हथियार ।

गणतंत्र की समस्या

किसकी बात मानी जाये , मौजूदा हालात तो यही कह रहा हैं कि जो तस्वीर समाज की दिख रही हैं , वह समस्या के चपेट में आ चुकी हैं । राजनीति और उसका प्रभाव कितना पड़ा हैं ,यह देखा जा सकता हैं । जनता को आज तक तो प्राथमिक सुविधायें मुहैया नहीं हो पायी । राजनीति के मायने भी बदल गयें है , आज राजनीति का मतलब बस इतना ही रह गया हैं कि राजनेता कितनी चतुराई दिखा सकते हैं , कितनी चतुराई से आपको बहला सकते हैं । और कितनी चतुराई से जनता को मन की बात सुना सकते हैं ।
प्लूटो से लेकर दीनदयाल उपाध्याय तक , और नेहरु से लेकर मोदी तक आते – आते इतना तो स्पष्ट हो ही जाता हैं कि गणतंत्र इनके हिसाब से तो नहीं बदला वरन् गणतंत्र समस्या के चपेटे में जरुर आ गया । यें समस्या हैं – देश में आज भी ऐसे करोड़ो घर हैं जिन्हें दो जून की रोटी मुहैया नहीं हो पाती हैं । विविधता (Diversity) को अपना रुप – रंग मानने वाले भारत में चुनाव के समय बताया जाता हैं कि तुम हिंदू और वह मुसलमान हैं । क्या यहीं हैं गणतंत्र ?
आये दिन देश में बदहाली का माहौल बढ़ता जा रहा हैं , देश के एक बड़े तबके को आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा हैं । महिला सुरक्षा पर आज भी प्रश्नचिह्न क्यों हैं , आज भी  भ्रूणहत्या , शोषण , दहेजहत्या  जैसी घटनाएं क्यों जारी हैं । देश के युवा अपना दायित्व बस अपने तक सीमित रख रहें हैं ।
देखते हैं कि गणतंत्र की समस्या कब जाकर थमती हैं ।

Abhijit Pathak

लीक से हटना यानि system पर ध्यान

दुनिया में समय – समय पर जो भी लीक से हटकर काम करने वाले आयें , उन्होनें ने यह साबित करना चाहा कि आखिरकार हमें कैसे अपने वजूद को बनायें रखना हैं । उन्होनें अपनी कही बातों को दुनिया के सामने रखा , और उसे समझाने की पूरी कोशिश की । आप सभी  जानते हैं कि दुनिया में दो चिजें होती हैं । पहला होता हैं system (निकाय ) और दूसरी surrounding .
अब जिस बिषय को हम पढ़ते हैं , वह हमारे लिए उस समय के लिए system हुआ । या यूं कहे कि जिस पर भी  हम कुछ सोच रहें है , कर रहें हैं , देख रहें हैं , हँस रहे है , यानि हमारे लिए दुनिया की हरेक गतिविधि , जिसमें हमारा कोई विजन हो , उसे हम system कहते हैं । और system के अलावा जो भी  इस संसार में हैं , वह हमारे लिए surrounding हुई । तो हमें सबसे ज्यादा concentrate कहा करना है । अपने system पर  । दुनिया की कोई ताक़त इस काबिल नहीं है कि आपको आपके निर्धारित मुकाम तक जाने से रोक दें ।
    
                                  – अभिजीत पाठक

Abhijit Pathak

आपका दायरा

आपको कोई अधिकार नहीं की किसी के इच्छा का सम्मान किये बगैर आप अपनी हरकतें जारी रखे । आपकी आजादी का खात्मा तभी हो जाता हैं , जब आप किसी के ऊपर अपना बेहद घटिया रुख अपनाने की कोशिश करते हैं ।

Abhijit Pathak

युगाब्द पुरुष विवेकानंद

आचार से अपरिचित विचार वाली परंपराओं , रुढ़ियों , प्रथाओं , अन्याय , अत्याचार , भ्रष्टाचार आदि मिटाने का श्रेय युगाब्द पुरुष , कोलकाता की माटी को प्रेरक बनाकर , भारत में राष्ट्रीय अखण्डता के लिए युवाओं को पास पास लाने वाले , विश्व मंच पर अपनी बात मनवाने वाले , भारत जागो विश्व जगाओं जैसे उद्घोष से एक जनक्रांति पैदा करने वाले , सही समय पर आकर अपने ऊर्जा को देश के हित में लगाने वाले , किसी भी  देश में युवाओं को उसका काम धाम बताने वाले , देश के युवाओं को फौलाद बनाने वाले , स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस पर हमें हमारा उत्तरदायित्व समझकर हमेशा राष्ट्रहित में काम करना चाहिए । देश का अगर एक पत्ता भी  हिले तो हमें पता होना चाहिए क्योंकि ऐसा विवेकानंद ने ही कहा था ।
आज हमें विवेकानंद को पढ़ना चाहिए  , समझना चाहिए । और एक ऊर्जा के भण्डार होने के नाते अपनी जिम्मेदारी को समझकर हमेशा राष्ट्रवाद के लिए काम करना चाहिए ।

Abhijit Pathak

विचार का बदलाव से ताल्लुक़ !

विचार और बदलाव का बड़ा ही अजीबोगरीब दास्तान हैं  । बदलाव तब तक अपने वजूद में नहीं आता , जब तक विचार अपना पूरा जोर ना  लगा दे । विचार इक नाव की तरह हैं जो आपको उस पार यानि बदलाव तक पहुँचा देता हैं । कभी भी  नाविक को मत भुलाइयेगा क्योंकि विचार रुपी नाव को बदलाव की दहलीज पर पहुँचाने वाला नाविक आपका धैर्य ही हैं । अगर मेरी बातें आपको समझ में आ गयी होंगी , तो इस कायनात में किसी की औकात नहीं है कि आपको मंजिल तक  पहुँचने   से रोक सके ।।

Abhijit Pathak

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