पहले आधारशिला तो बना लिजिए ।

अगर बात की जाय उस शुरुआती दौर की , जहाँ से हम किसी मुकाम तक पहुंचने के लिए एक सुनियोजित रास्ता बनाते हैं । हाँ ,शायद यह भी हो  सकता हैँ कि इसके लिए हम बिना सोचे समझे भी वहाँ तक पहुँच सकते हैं । लेकिन क्या हम लगातार इसे बनाये रखने में कामयाब हो सकते हैं । अगर आप  संभावनाओं  के बल पर तरक्की के आसार बनाने के आदी हो चुके हो ,तो उसे तुरंत छोड देना चाहिए ।

हमारे लिए हर वक्त एक सुनहरा अवसर प्रतिक्षा के लिेए नजरें गड़ाये बैठा रहता हैं । पर पहले उसे पहचानने के लिए आधारशिला तो बना लिजिए ।

LOVE IS VALENTINE

Love is valentine ,
without Valentine world  break and fight .In other word I can say that love is Valencia , because Valentine is made up from Valencia . and It have tendency to unite the heart of each other in this universe . Due to this reason , Please Valentine to everyone for retain the identity of love .

Abhijit Pathak

अलविदा 2015

बीते वर्ष पर हमकों एक नज़र दौड़ा लेना चाहिए  , 2015 जिसने हमें एक सुनहरे रास्ते पर कदम बढ़ाने का मौक़ा दिया । और साथ ही साथ कुछ ऐसे अनुभवों से वाकिफ हुए , जो हमारे लिए हमेशा के लिए यादगार बना रहेगा । 2015 ने अपनी तरफ से पूरा प्रयास किया था कि हमे कुछ नया सीखा कर जाये । हाँ , जरुर हमने नये तरीके से सोचना सीखा । लेकिन हमारी कुछ लापरवाही या गंभीरता ना दिखाने का कारण , हमारे अन्दर पूरी तरह से बातों को समेटने की क्षमता को कुछ कम कर दिया ।
जो काम 2015 में हमने गंभीरता से नहीं किया , आज यह वादा करे कि उसे पूरा करने के लिए जी जान लगा देंगें ।।

Abhijit Pathak

Watch “Energy conservation” on YouTube

आखिर क्या वजह है कि आज ऊर्जा संकट जैसा गंभीर मुद्दा , हमारे लिए कोई तवज्जो नहीं रखता हैं ।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऊर्जा संकट

जब इस देश में बात होती हैं , ऊर्जा संरक्षण की तो हमारे यहाँ का शासन मौन हो जाता हैं । ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 तो बना दिया गया । लेकिन आज उसके 14 वर्ष होने के बावजूद लोग उसके प्रति कितने जागरुक हुए हैं  ?  जब भी  देश में एक छोटा सा योजना लाया जाता हैं , राजनेता ऐसे इतराते हैं कि जैसे उन्होनें कोई बड़ा काम कर दिया हैं । लेकिन परदें के पीछे की सच्चाई कुछ और ही हैं ।
जिस प्रकार देश ने 1970 में ऊर्जा संकट को झेला था । हमारे यहाँ की व्यवस्था की लापरवाही के कारण हमे फिर से उसी संकट को झेलना पड़ सकता हैं ।
आज देश के ऊपर ऐसी समस्या दस्तक देने वाली हैं , जिसका कारण यहीं है कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था ने तमाम योजनाओं का खाका तो लाकर रख दिया , लेकिन योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन न करने के कारण इसे सफलता नहीं मिल पायी ।

बस अपनी धड़कन की सुनो !

हारने के  बाद पछताना मत , जीत तुम्हारा ही होगा । क्योंकि यह हार एक विराम हैं , जीवन और कामयाबी का बड़ा ही अलग तरह का रिश्ता है । हर हार से सीखो , यह जो सीखा देता है ना,  जीतकर कभी भी  लोग उस पल को समझ ही नहीं पाते हैं । गिरना सिखो , सिखो गिरना । फिर गिर – गिरकर उठना सिखो । हर असफलताएं हमको आखिरकार कोई ना कोई नई सीख देकर ही जाती है , तो इस असफलता से इतना भय क्यों ? इस असफलता के बाद अपने उड़ान पर निर्भीकता बनाई जा सकती हैं ,  जो आपके कामयाब होने का द्वार खोलने में  थोड़ा भी  कसर नहीं छोडेगी ।
आत्मनिर्भर बनने के लिए लोगो को पतवार में फँसना ही पडता हैं क्योंकि पतवार या समस्या हमारे उस विशेष मार्गदर्शक के समान हैं जो अपने आप को उसकी कामयाबी में पूरी तरह लगा देता हैं ।
अगर आपके पास ऊर्जा है तो उसे किसी को दिखाने के लिए क्यों खर्च करते रहते हो । आप अपने अन्तरतम में छुपे हुए , उस निडर प्राणी से पूछकर देखो , वह कभी भी  तुम्हारे हाँ मे हाँ नहीं मिलायेगा ।क्योंकि वास्तविकता यहीं है कि जब तुम उसका सम्मान नहीं करोगें , तो सामने वाले को क्या पडी़ है तुम्हारे सम्मान की । और उस वक़्त वह तुमसे ज्यादा अपने कार्य में निपुण हैं । तुम्हारा अंतर्मन तुमको सहारा तभी  देगा , जब उसको तुम आभास करा पाओं की , तुम उसके साथ खडे़ हो । और अपनी धड़कन की सुनने वाले कभी भी  नाकामयाब नहीं होते ।
तो बनावटी बनना छोड़कर बस अपनी धड़कन की सुनो ।

जेटली और केजरी की जोर आज़माइश

दिल्ली सचिवालय में CBI के छापे और प्रधान सचिव को पूछताछ के लिए ले जाने के बाद , आम आदमी पार्टी के द्वारा प्रेस कान्फ्रेंन्स किया गया । आप नेताओं ने आरोप लगाया हैं कि जेटली के कार्यकाल में बड़ा वित्तीय घोटाला हुआ था । जब जेटली DDCA के प्रमुख थे , और वे इस पद पर 13 वर्षो तक कार्यरत थे ।
आप के प्रवक्ता राघव चड्ढा की माने तो यह स्पष्ट है कि जेटली अपने कार्यकाल के दौरान बड़े पैमाने पर हुए घपलों मे सहभागीदार थे । प्रधानमंत्री अगर CBI की जाँच में पक्षपात नहीं कर रहे , तो तुरंत जेटली का इस्तीफा ले लेना चाहिए ।
अब चलते है जेटली की सफाई की तरफ जहाँ उन्होनें पलटवार करते हुए कहा कि मेरे ऊपर आरोप का झूठा प्रचार किया जा रहा हैं , 2014 और 2015 के कुछ फैक्ट के आधार पर केजरीवाल मुझे DDCA के विवाद में अनायास खींच रहे हैं ।
इन दोनों पक्षो की बातों के मद्देनजर यह बात तो स्पष्ट हो ही जाता कि घोटाले तो हुए हैं । लेकिन जिम्मेदार कौन हैं ?
सारी बातें छोडिए अगर AAP को जेटली के आरोपों की जानकारी थी । तो उसने इसे इससे पहले सार्वजनिक क्यों नहीं किया ?
इस वाकया से यहीं साबित होता है कि अगर तुम हमारी बातें सार्वजनिक करोंगे , तो हम भी  तुम्हारा पर्दाफ़ाश करने में कसर नहीं छोडे़गे ।
जेटली और केजरी की चक्कर में आम आदमी के साथ विश्वासघात  , और सबका विकास तो कम से कम नहीं रुकना चाहिए ।
अब मेरा निवेदन है दोनों जन से , कि अपना जोर आज़माइश जारी रखे ।

कलाम राष्ट्रपति बनने का सफर

देशवासियों के साथ गहरा ताल्लुक़ रखने वाले कलाम एक राष्ट्रहितैषी , कर्मठी और परामर्शी व्यक्तित्व के धनी कहे जा सकते हैं । देश के 11वें राष्ट्रपति , भारतरत्न तथा मिसाइलमैन के नाम से मशहूर अब्दुल कलाम अपने सात भाई बहनों में सबसे छोटे थे । इनके माता – पिता ने क्या कभी सोचा होगा कि रामेश्वर के एक छोटे कस्बे का लड़का , भारत को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को अपनी प्रतिभा से चौंका देगा । उसकी सोच पूरी दुनिया को भारत के बारे में सोचने पर मजबूर कर देगी ।

गरीब परिवार से ताल्लुक़ रखने वाला कलाम बेहद कम उम्र में कमाना भी  शुरु कर दिया  , काम था अखबार बेचना । इनकी प्रारंभिक शिक्षा रामेश्वरम के प्राथमिक स्कूल में हुई । स्कूलिंग पूरी होने के बाद इन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से 1954 में फिजिक्स में ग्रेजुएशन किया ।
DRDO में एन्ट्री उसके बाद ISRO में उनकी कडी मेहनत यह साबित कर देती हैं कि कलाम ऐसे देशभक्त थे जो राष्ट्र हित में 18 घंटे लैब में बिताते । अब उनका सफर शुरू होता हैं एक सांइन्टिस्ट से देश के प्रथम नागरिक बनने तक का । कलाम का व्यवहारवाद और सफल छवि कभी भी  किसी रुकावट का मुँह देखने को मजबूर नहीं हुई । यही कारण था कि 2002 के राष्ट्रपति के अप्रत्यक्ष चुनाव में कलाम सफल हुए ।

आधी दुनिया और आधुनिकता

तुम भूल गये पुरुषत्व मोह में ,
कुछ सत्ता है नारी की ।
समरसता हैं , संबंध बनी ,
अधिकार और अधिकारी की ।

जी हाँ , मै उसी आधी दुनिया की बात कर रहा हूं , जिसने अपने मातृत्व की छाव में ना जाने कितने रणबांकुरों का सृजन कर इस समाज को व्यवस्थित और सही ढंग से चलाने के लिए  अनेको प्रतिभाओं को इस जहान को दे दिया  ।
अपने बल पर जिसने हर पल में  एक असाधारण गतिविधियों को अंजाम दिया । सीता एक ऐसी भारतीय नारी थी , जिन्होंने दो ऐसे स्वावलंबी बच्चों को जन्म दिया , जो आगे चलकर दो देशों आस्ट्रेलिया और आस्ट्रिया के राजा बनते हैं ।
गार्गी का याज्ञवल्क्य से शास्त्रार्थ होता हैं और यह शास्त्रार्थ तब करने पहुँचती है जब दुनिया के सारे विद्वान उनसे परास्त हो चुके होते हैं ।

प्रेम की व्यापकता सिद्ध करने में माहिर भारतीय नारी भी  एक ऐसा माहौल बना देती हैं । जो कभी  तुलसीदास जैसे लोगो को सही दिशा दिखा देती हैं । और उनकी ऊर्जा एक सही दिशा में लगाने के कारण ही पांचवा वेद रामचरितमानस प्राप्त किया जा सकता हैं ।

प्रेम की पराकाष्ठा सिद्ध करने वाली मीराबाई कभी  भी  अपने प्रियतम कृष्ण को देखा तक नहीं और प्रेम पर विश्वास कर विष भी  पी लिया । और दुनिया को चलाने वाले सुप्रीम पावर को भी  झक मारकर आना पड़ता हैं ।

आज हर क्षेत्र में महिलाओं ने राष्ट्रहित में पूरी सहभागिता बरती हैं ।जिसका नाज़ पूरी दुनिया को होना ही चाहिए । महिलाओं का सम्मान हमारी शिष्टाचार में निहित था । लेकिन पश्चिम की देखादेखी करके हम उनका शोषण होता देख रहे हैं । बिना इतिहास में झांके हम ना वर्तमान सुधार सकते है और ना ही भविष्य संवार सकते हैं ।

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