कुछ हो नहीं रहा हैं, बस बदलाव की उम्मीद कैसे कर लूं.

पता नहीं क्यों आज  सुबह से मै बहुत परेशान हूं, कोई बात भी नहीं है . मुझे मेरे आसपास की चीज़े जिसे परिवेश भी कहा जा सकता हैं मन में इस हद तक घर कर जाती है कि उसके बाद मै उनसे बाहर नहीं निकल पाता. मै अक्सर चाय की दुकानों पर जब छोटे बच्चोंContinue reading “कुछ हो नहीं रहा हैं, बस बदलाव की उम्मीद कैसे कर लूं.”