ITMI संस्मरण: “प्रकृति इज माय डैड”- शुभांग चौहान

शुभांग भाई का व्यक्तित्व एकदम अलहदा है. क्लास में कोई ऐसा नहीं होगा, जिसकी खिंचाई शुभांग चौहान ने ना की हो. यहां तक की मेरी कविता और बोलने के तरीके की भी नकल कर सबको खूब हंसाते. कोई इस बात का बुरा क्यों माने जब जिंदगी की तमाम उलझनों से बाहर निकालने वाला कोई दोस्तContinue reading “ITMI संस्मरण: “प्रकृति इज माय डैड”- शुभांग चौहान”

ITMI संस्मरण: मौला! कैसी-कैसी सूरतें तूने बनाई हैं!

आंचल का नाम आते ही मन में एक ही ख्याल आता है. अमिताभ बच्चन वाला खयाल नहीं आता है. जिसे साहिर ने अमृता के लिए लिखा था. खयाल बस इतना ही कि ITMI में टीवी जर्नलिज्म की एक स्टूडेंट जिसकी चश्मेबद्दूर और सियाह आंखें इतनी वाचाल कि 20 फीसदी संवाद उसी के जरिए किया जाContinue reading “ITMI संस्मरण: मौला! कैसी-कैसी सूरतें तूने बनाई हैं!”

ITMI संस्मरण: बिना ‘लब्बोलुआब’ वाला रोहित

कबीरदास का एक दोहा है जो हमारे रोहित के ऊपर सटीक बैठता है! परमारथ हरि रुप है, करो सदा मन लायेपर उपकारी जीव जो, सबसे मिलते धाये. रोहित के व्यवहार की खूबसूरती इसलिए भी विशेष बन पड़ती है कि उसमें लेशमात्र भी Rigidity नहीं है. इंसान को ऐसे ही होना चाहिए कि सामने वाले सेContinue reading “ITMI संस्मरण: बिना ‘लब्बोलुआब’ वाला रोहित”

ITMI संस्मरण: एक ‘वदिया’ सी लड़की !

दीक्षा को बताने की शुरूआत कैसे करें ? पहले ये बता दें कि दीक्षा की विशेषताएं क्या हैं या फिर उनकी दिलचस्पी के दायरे बता दिए जाए. शुरूआत करता हूँ विशेषताओं से. मेरे बैच की लड़कियों में दीक्षा अकेली ऐसी हैं जो इतनी आसान हैं कि उन्हें समझने और बताने के लिए सिर्फ़ एक हीContinue reading “ITMI संस्मरण: एक ‘वदिया’ सी लड़की !”

ITMI-संस्मरण: बुलंदशहर की ‘दबंग’ लड़की!

((जब आप अतीत लिखने बैठते हैं. तो कितने ईमानदार रह पाते हैं? कुछ चीजें नज़रअंदाज कर रहा हूँ जो मेरे बिषयवस्तु के पैमाने में फिट नहीं बैठ रहा. लेकिन बुलंदशहर की बुलंद आवाज़ को तो बिल्कुल भी नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता. आज बात ज्योत्स्ना गुप्ता की. स्वभाव से जितनी कड़क उतनी ही नरम. मैंContinue reading “ITMI-संस्मरण: बुलंदशहर की ‘दबंग’ लड़की!”

ITMI संस्मरण: रहस्य शाकद्विपीय भोजक!

((मुझे सनातन परंपरा की दो घटनाएं बहुत ही प्रेरणास्पद लगती हैं. दोनों गंगा के इर्द गिर्द हैं. एक गंगापुत्र भीष्म पितामह की वो प्रतिज्ञा जिसमें वे जीवन भर ब्रह्मचारी रहने का संकल्प लेते हैं. दूसरा दर्जनों पीढ़ियां खत्म होने के बाद  गंगा को धरती पर लाने का भगीरथ-प्रयत्न. भीष्म प्रतिज्ञा और भगीरथ प्रयत्न का अनुशीलनContinue reading “ITMI संस्मरण: रहस्य शाकद्विपीय भोजक!”

संचारी भावावेश से भरा अपना पहाड़ी दोस्त !

((सुमित ने जितना मेरा साथ दिया, उतना तो मैंने खुद का ध्यान नहीं रखा होगा. उसके जैसे दोस्त मित्रता की आदर्श स्थितियों को आज भी बनाये रखने के लिए जिम्मेदार है. निश्छल मुस्कराहट से भरा चेहरा अगर आपका मन मोह ना ले तो कहिएगा.)) बंदा मीडिया इंडस्ट्री में जितने लोग हिमाचल से आते हैं. सबकोContinue reading “संचारी भावावेश से भरा अपना पहाड़ी दोस्त !”

बातचीत में भी ‘क्रिकेट टर्मिनोलाॅजी’ का इस्तेमाल करने वाला दोस्त: ‘गौतम सोढ़ी’

((2017 में नोबेल पुरस्कार विजेता और जापानी साहित्यकार काजुओ इशिगरो ने कहा कि एक लेखक के पास सब कुछ रचने की क्षमता और आजादी होनी चाहिए. इस मामले में मेरे सभी दोस्तों ने मुझे भरपूर छूट दिया है)) संस्मरण के छठवें अंक में सिर्फ़ गौतम सोढ़ी की बात. मेरे नज़र में गौतम की दो विशेषताएंContinue reading “बातचीत में भी ‘क्रिकेट टर्मिनोलाॅजी’ का इस्तेमाल करने वाला दोस्त: ‘गौतम सोढ़ी’”

व्यवहार की समानताओं की संगति Wid मयंक पटेल

((दोस्ती में बाध्यताएं ना हो तो कभी-कभी अच्छा भी लगता है और बुरा भी! इसमें थोड़ा सामंजस्य बिठा के रखा जाए तो दोस्ताना खूब लंबा चलता है. आशिकी की उम्र होती है दो दशक. दोस्ती ताउम्र करनी होती है.)) एक संस्कृत का सुभाषित है. मृगा: मृगैः संग्रमनुव्रजंति. इंग्लिश वाले इसे ‘like dissolve like’ लिखेंगे. हिंदीContinue reading “व्यवहार की समानताओं की संगति Wid मयंक पटेल”

ITMI संस्मरण: कई कलाओं की पारखी ‘खयाली’

((कोई भी चीज़ चलन से बाहर नहीं होती. अपना बचपन याद कीजिए. हर मां अपने बेटे को उंगलियां पकड़कर चलना सिखाती है. बड़े होने के बाद भी कदम-कदम चलने की प्रेरकता हमेशा बनी रहती है. फिर चाहे मोटर विहिकल और फ्लाइट्स ने आकर चलने का काम आसान कर दिया लेकिन कदम-कदम चलना हर युग मेंContinue reading “ITMI संस्मरण: कई कलाओं की पारखी ‘खयाली’”