24 सितंबर की डायरी से!

कमरे के घुप्प अंधेरे से मानो संधि कर लेना चाहता है मन कि अब उजाले के तिलिस्म में मत ले जाना. उन उजालों से भरोसा उठ चुका है. इस घने काले अंधेरे में मन की व्यथाएं कुछ हद तक शांत हो जाया करती हैं. फिर मन का एक तंतु घर पहुंच जाता है. अम्मा केContinue reading “24 सितंबर की डायरी से!”