9 सितंबर की डायरी से

चंद पैसों और फायदे के फ़ेहरिस्त में लोग अपने मूल्यों से आए दिन समझौता कर रहे हैं. ये व्यक्तिवाद का सर्वोत्कृष्ट पतन है. आज के दौर में संबंधों पर आरुढ़ होने के बजाय लोग पद और मामूली महत्वाकांक्षाओं के सामने नतमस्तक हो रहे हैं. तर्कों के अन्वेषी लोग ‘लेट अस अस्यूम’ की संभावनाओं में गोतेContinue reading “9 सितंबर की डायरी से”