बहुत निराला वो आजमगढ़ है!

नये सफर के पड़ाव पर हम,पुराने पल को पलट रहे हैं.मेरे ज़ेहन के दीवार पर;उस शहर की मिट्टी पटी पड़ी है!जहां पर मैंने जनम है पाया,जहां की माटी को सिर लगाया.हुआ बड़ा जिस जगह का खाकर,बहुत निराला वो आजमगढ़ है.मेरे लड़कपन का जो शहर है. बहुत ही अद्भुत जमीं है अपनी,अत्रि मुनी की तपस्थली है.अनुसूइयाContinue reading “बहुत निराला वो आजमगढ़ है!”