सुशांत को अपना आदर्श मत बनाइए!

मैं भी सोच रहा हूँ कि साला सुशांत की तरह सुसाइड कर लूं. लोगों की नजरों में कम से कम अच्छा तो बन जाऊंगा. अगर सुसाइड करने से आपकी अच्छाई की परख लोगों को हो रही हो, तो इससे नायाब रास्ता तो और कोई हो ही नहीं सकता. चलिए इसे एक मिशन के तहत अपनाContinue reading “सुशांत को अपना आदर्श मत बनाइए!”

9 सितंबर की डायरी से

चंद पैसों और फायदे के फ़ेहरिस्त में लोग अपने मूल्यों से आए दिन समझौता कर रहे हैं. ये व्यक्तिवाद का सर्वोत्कृष्ट पतन है. आज के दौर में संबंधों पर आरुढ़ होने के बजाय लोग पद और मामूली महत्वाकांक्षाओं के सामने नतमस्तक हो रहे हैं. तर्कों के अन्वेषी लोग ‘लेट अस अस्यूम’ की संभावनाओं में गोतेContinue reading “9 सितंबर की डायरी से”

काश! तुम अपने पिता से जुड़े रहते सुशांत…

वे महिलाएं जो रिया चक्रवर्ती की तरह सिर्फ़ पैसों के लिए प्यार में आती हैं, उन्हें क्या पता कि पैसा सिर्फ अशांति का कारण बनता है. वाकई पैसा आपको सभी सुविधाओं से भर देगा. विलासिता के सभी मानकों तक पहुंचाएगा लेकिन यही एक दिन आपको चैन से जीने नहीं देगा. बताइए उस पिता पर क्याContinue reading “काश! तुम अपने पिता से जुड़े रहते सुशांत…”