आतंकवाद से भी ख़तरनाक है लश्करे मीडिया?

लश्कर-ए-मीडिया एक गिरोह है, जो आतंकवाद से भी नुकसानदेह है. महामारी के समय अगर ये चाहती तो अस्पतालों की खराब व्यवस्था पर रिपोर्ट कर लाखों जिंदगियां बचा सकती थी. लेकिन इससे ऐसा नहीं किया. सुशांत+रिया+कंगना+नेपोटिज्म+अनुराग+बाॅलीवुड ड्रग रैकेट से क्या निकला और कितने भारतवासियों का लाभ हुआ. इसमें दूरदर्शिता और प्राथमिकताओं के मूल्यांकन का इतना अभावContinue reading “आतंकवाद से भी ख़तरनाक है लश्करे मीडिया?”

9 सितंबर की डायरी से

चंद पैसों और फायदे के फ़ेहरिस्त में लोग अपने मूल्यों से आए दिन समझौता कर रहे हैं. ये व्यक्तिवाद का सर्वोत्कृष्ट पतन है. आज के दौर में संबंधों पर आरुढ़ होने के बजाय लोग पद और मामूली महत्वाकांक्षाओं के सामने नतमस्तक हो रहे हैं. तर्कों के अन्वेषी लोग ‘लेट अस अस्यूम’ की संभावनाओं में गोतेContinue reading “9 सितंबर की डायरी से”

काश! तुम अपने पिता से जुड़े रहते सुशांत…

वे महिलाएं जो रिया चक्रवर्ती की तरह सिर्फ़ पैसों के लिए प्यार में आती हैं, उन्हें क्या पता कि पैसा सिर्फ अशांति का कारण बनता है. वाकई पैसा आपको सभी सुविधाओं से भर देगा. विलासिता के सभी मानकों तक पहुंचाएगा लेकिन यही एक दिन आपको चैन से जीने नहीं देगा. बताइए उस पिता पर क्याContinue reading “काश! तुम अपने पिता से जुड़े रहते सुशांत…”

सारे मर्द एक जैसे नहीं होते!

फेमिनिज्म के मुंडेर पर बैठी वो महिलाएं आज चुप हैं, जो एक पुरूष की विकृतियों को समूचे मर्द जमात पर चस्पा कर देती हैं और बड़े आराम से कह देती हैं कि सारे मर्द एक जैसे होते हैं. एक जैसे नहीं होते सारे मर्द और ना ही महिलाएं एक जैसी होती हैं. फेमिनिज्म के पाखंडContinue reading “सारे मर्द एक जैसे नहीं होते!”

‘अपना गम़ लेके कहीं और ना जाया जाए’

अपने ट्विटर हैंडिल से अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने कुछ समय पहले निदा फाजली की एक गजल शेयर की थी. जो उनकी हैंडराइटिंग में है. मेरा मानना है कि किताबों से प्यार करने वाला कोई भी इंसान सुसाइड तो कर ही नहीं सकता. सुशांत के सुसाइड के पीछे उनका असंतोष क्या था, ये तो जांचContinue reading “‘अपना गम़ लेके कहीं और ना जाया जाए’”