ITMI संस्मरण: दिल नाउम्मीद तो नहीं ! ‘विशाल शर्मा’

((विशाल भाई से आपकी असहमतियां हो सकती हैं, लेकिन किसी भी मनमुटाव को रखने के लिए उनके विशाल ह्रदय में कोई जगह नहीं होती. वो फ़िक्र के मुंडेर पर बैठे ऐसे सारथि हैं, जिन्हें अपने साथ के लोग अर्जुन जैसे लगते हैं.)) मैंने ऐसे बहुत कम लोग देखे हैं, जिन्हें बरबस ही अपने साथ रहनेContinue reading “ITMI संस्मरण: दिल नाउम्मीद तो नहीं ! ‘विशाल शर्मा’”