आखिरकार एनएसजी से जुड़े जिस भी देश प्रधानमंत्री पहुंचते है वहां पर क्यों एनएसजी को लेकर चर्चाएं शुरू हो जाती है. क्यों भारत को एनएसजी से जोड़ने के लिए स्विट्जरलैंड से लेकर अमेरिका तक अपना हाथ आगे बढ़ा रहे है.
एनएसजी की सदस्यता लेना भारत के लिए कितना आवश्यक है और इसके मिलने से भारत को क्या फायदे हो सकते है. आखिर क्यों एनएसजी से जुड़े जिस देश प्रधानमंत्री जा रहे है वहां के राष्ट्राध्यक्ष इसकी सदस्यता के लिए अपने समर्थन के लिए हामी भर रहे है.
क्या है एनएसजी (Nuclear Supllier Group) ?
एनएसजी 48 देशों का एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है. एनएसजी का मकसद परमाणु हथियार का प्रसार रोकना है और सदस्य देशों द्वारा मिलकर परमाणु संयंत्र के माध्यम से ऊर्जा का उत्पादन कार्य पर जोर देना भी है. ऊर्जा उत्पादन का ये कार्य परमाणु सामग्री के आदान प्रदान से ही संभव है इसलिए केवल शांतिपूर्ण काम के लिए इसकी आपूर्ति की जाती है.
इसके लिए भारत एनपीटी (Non-Proliferation Treaty) की सदस्यता लेनी होगी. एनपीटी परमाणु हथियारों का विस्तार रोकने और परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण ढंग से इस्तेमाल को बढ़ावा देने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का एक हिस्सा है
एनएसजी की सदस्यता के बाद भारत को मिलने वाले फायदे
सदस्यता मिलते ही भारत परमाणु से जुड़ी सारी तकनीक और यूरेनियम बिना किसी समझौते के हासिल कर सकेगा. सदस्य राष्ट्रो से काफी मदद मिल सकती है. एनएसजी के सारे सदस्य वीटो का अधिकार प्राप्त कर चुके है इस प्रकार भारत की साख में वृद्धि की भरपूर संभावना बन सकेगी.
भारत में दुनिया का हर छठा व्यक्ति रहता है लेकिन भारत ऊर्जा उत्पादन करता है लगभग 2 से 3 फीसदी. ऊर्जा की बढ़ती समस्या की भरपाई करने के लिए इसे एनएसजी का सदस्य बनना बेहद जरूरी है.
अमेरिका, फ्रांस और स्विट्जरलैड भारत के साथ
स्विट्जरलैंड के इस दौरे से भारत को एक बड़ा तोहफा मिला है. तोहफा ये है कि एनएसजी को लेकर स्विट्जरलैड भारत का समर्थन कर चुका है.
एनएसजी की सफलता हासिल करने में स्विट्जरलैंड का साथ बेहद जरुरी है, क्योंकि बिना इसके समर्थन के भी इस राह पर आगे बढ़ने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता था क्योंकि जब ये संगठन बना तो इसमें केवल 7 देश थे – कनाडा, पश्चिम जर्मनी, फ्रांस, जापान, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम, और अमेरिका. लेकिन जब इस संगठन में और देश शामिल किए गए तो स्विट्जरलैंड भी उसमें से एक था.
अमेरिका ने तो इसके लिए अपना समर्थन दे रखा है. अमेरिका यात्रा का ये चौथा दौरा है लेकिन प्रधानमंत्री ने अमेरिका से एनएसजी समर्थन को कब का हासिल कर लिया है.
चीन नहीं दे रहा साथ
आपको बता दे कि प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच दो मुलाकात होने के बाद भी कोई सकारात्मक संकेत नही दिख रहे है.
सदस्यता के लिए भारत है प्रयासरत
एनएसजी की सदस्यता पाने के लिए भारत निरंतर प्रयासरत है और जल्द ही ये आस्ट्रेलिया और जापान से भी इस मुद्दे को लेकर बात करेगा.